Harsha Kumari Singh
हर्षा कुमारी सिंह एनडीटीवी की एग्जीक्यूटिव एडिटर है। वे राजस्थान से एनडीटीवी का जाना माना चेहरा है और वो अंग्रेजी और हिंदी दोनों में रिपोर्ट करती है। हर्षा करीब ३० साल से पत्रकारिता कर रही हैं और आज भी ग्राउंड से जर्नलिज्म करने में यकीन रखती है। उनका मानना है कि एक पत्रकार को असली कहानियां जमीन पर उतर कर ही मिलती है। वहीं से उसकी समझ विकसित होती है।
वे राजनीति, डिफेंस, गवर्नेंस, क्राइम, लीगल, पर्यटन के साथ लोक कला और संस्कृति को कवर करने में रुचि रखती है। हर्षा राजस्थान के उस ऐतिहासिक गांव आउवा से आती हैं, जहां के ज़िक्र के बिना पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम '1857 की क्रांति' की कहानी अधूरी है। आउवा और यहां की कुलदेवी सुगाली माता के बारे में इतिहास के पन्नों में लिखें स्वर्णिम अध्याय को आज भी पढ़ाया जाता है। हर्षा को राजस्थान के कल्चर की गहरी समझ है। हिंदी और अंग्रेजी के साथ राजस्थान की स्थानीय बोलियां और भाषाएं बखूबी समझती है। उन्होंने दिल्ली में एंकरिंग और रिपोर्टिंग से पत्रकारिता का अपना करियर शुरू किया। इसके बाद गुजरात में भी रिपोर्टिंग की।
उन्होंने के सुपर एक्सक्लूसिव इंटरव्यूज़ किए है हर्षा अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के भारत दौरे के दौरान उनकी पत्नी ऊषा वेंस का इंटरव्यू करने वाली पहली और एकमात्र भारतीय जर्नलिस्ट रही। जसवंत सिंह जब भाजपा छोड़कर आए तो उनका पहला इंटरव्यू हर्षा ने ही किया। इस दौरान वे भावुक हो गए, यह इंटरव्यू राजस्थान से लेकर देश के राजनीतिक किरदारों और आम लोगों के बीच खूब चर्चा का विषय बना। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बजट के बाद पहला एक्सक्लूसिव इंटरव्यू हर्षा ने ही किया।
इसके अलावा अपने करियर के दौरान राजस्थान के सभी मुख्यमंत्रियों और बड़े राजनेताओं के इंटरव्यू किए हैं। उन्हें अपने लंबे करियर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव की कवरेज के साथ ऑपरेशन सिंदूर और 2008 जयपुर बम ब्लास्ट जैसे चुनौतीपूर्ण माहौल में ग्राउंड रिपोर्टिंग करने का अनुभव है। उन्होंने अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे सिंधिया, सचिन पायलट से लेकर सभी बड़े नेताओं के जमीनी संघर्ष से लेकर सरकारी गलियारे तक पहुंचने की कवरेज की है। राजस्थान की राजनीतिक उथल पुथल के दौर की गवाह रही हैं।
हर्षा सामाजिक ताने बाने को बखूबी समझती है। जेंडर, जाति और समुदाय से जुड़े सामाजिक आर्थिक पहलुओं की रिपोर्टिंग करने में रुचि रखती है। वे मानती हैं कि हम जो इंसान की तरह अनुभव करते हैं, देखते हैं, उसे ही अपने लेख में उतारें। उनकी आवाज़ बनें , जिन्हें आवाज़ उठाने का अवसर नहीं मिला, यही पत्रकारिता का उद्देश्य है।