रवीश कुमार का प्राइम टाइम: मई 2019 में भारत में किसके और क्यों हैक किए गए फोन?

PUBLISHED ON: October 31, 2019 | Duration: 5 min, 05 sec

  
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सारे नाम वही हैं जो जोखिम उठाकर आम लोगों के लिए केस लड़ते हैं. जिन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया जाता है. इन लोगों को टारगेट करने का क्या मकसद रहा होगा? एन एस ओ अपनी वेबसाइट पर लिखता है कि वह सख्त प्रक्रियाओं के बाद ही किसी को अपना सॉफ्टवेयर बेचता है लेकिन सॉफ्टवेयर खरीदने के बाद कोई कैसे इस्तमाल करेगा इस पर एन एस ओ का कोई वश नहीं होता है. मीडिया में ढेरों ऐसी खबरें मिलती हैं जिनसे पता चलता है कि सुरक्षा के नाम पर खरीदा गया यह सॉफ्टवेयर अलग-अलग देश के पत्रकारों और राजनीतिक विरोधियों पर नज़र रखने में किया जाता है. उन पर हमला करने में किया जाता है. बिज़नेस इनसाइडर की बैकी पीटरसन की 6 सितंबर 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक इज़राइल में एन एस ओ जैसी कंपनियों की संख्या दो दर्जन से भी ज़्यादा है. एन एस ओ की लागत एक बिलियन अमरीकी डॉलर तक आंकी गई है. पीटरसन के मुताबिक एन एस ओ का पिछले साल का मुनाफ़ा 125 मिलियन डॉलर था. हमने उन लोगों से बात की है जिनके पास फोन आया था कि उनका फोन हैक हो चुका है. इनमें से एक हैं शुभ्रांशु चौधरी. सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वे बताते हैं कि उन्हें कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के विभाग सिटिजन लैब की ओर से फोन कर बताया गया था कि उनका फोन इजराइली सॉफ्टवेयर से हैक किया गया है.
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