रवीश कुमार का प्राइम टाइम : शी चिनफिंग का भारत दौरा और चीन के सस्ते सामान की चुनौती

PUBLISHED ON: October 11, 2019 | Duration: 40 min, 39 sec

  
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सीमा विवाद और कश्मीर से अलग हट कर भारत और चीन के संबंधों को व्यापार के नज़रिए से देखा जाना चाहिए. आखिर क्यों भारत में चीन से आयात बढ़ता जा रहा है और भारत से चीन में निर्यात घटता ही जा रहा है या नहीं बढ़ पा रहा है. इस स्थिति को व्यापार घाटा कहते हैं. भारत और चीन के बीच 100 अरब डालर का व्यापार पहुंचने वाला है. पिछले साल 95.5 अरब डॉलर हो गया था. अब आप इस आंकड़े को व्यापार घाटे की नज़र से देखिए. दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ भारत का कुल व्यापार घाटा 105 अरब डॉलर का है. इसमें से सिर्फ चीन के साथ 53 अरब डॉलर का घाटा है. 2013-14 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 36 अरब डॉलर का था. 2018-19 में यह व्यापार घाटा बढ़कर 53 अरब डॉलर का हो गया. चीन से आयात बढ़ता ही जा रहा है यानी भारत के बाज़ार चीनी माल से भरे हैं. नौकरियां चीन में पैदा हो रही हैं. चीन दावा करता है कि भारत में 1000 चीनी कंपनियां खुल गई हैं. 8 अरब डॉलर का निवेश है और दो लाख लोगों को काम मिला है. नीति आयोग की रिपोर्ट 2017 की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 में भारत ने आसियान देशों और चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता साइन किया था. उस वक्त भारत का व्यापार सरप्लस था. हम चीन को 53 अरब का निर्यात करते थे. अब वो उल्टा हो गया. चीन निर्यात कर रहा है. तो भारत और चीन के बीच इस संबंध से भारत को क्या मिला. चीन के बांग्लादेश के साथ व्यापारिक संबंध बेहतर होते जा रहे हैं. चीन ने बांग्लादेश को न्यूक्लियर पावर प्लांट और प्राकृतिक गैस संसाधनों को विकसित करने की पेशकश की है.
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