रवीश कुमार का प्राइम टाइम : झारखंड लिंचिंग - कहां गए सुप्रीम कोर्ट के लिंचिंग पर दिशानिर्देश?

PUBLISHED ON: June 24, 2019 | Duration: 48 min, 58 sec

  
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झारखंड के सरायकेला में 24 साल के तबरेज़ अंसारी को सात घंटे तक बिजली के खंभे से बांध कर मारा जाता रहा. मारने वाले के मन में कितना गुस्सा भरा होगा, कितनी घृणा भरी होगी कि वह एक शख्स को जान से मारने की हद तक मारता रहता है. आरोप है कि तबरेज़ मोटरसाइकिल चुराते पकड़ा गया था. एक मिनट के लिए भूल जाइये कि मार खाने वाला तबरेज़ और मारने वाला पप्पू मंडल है. मारने का वीडियो बनाने और भीड़ का खड़े होकर तमाशा देखने वालों को भी भूल जाइये. अब आप याद कीजिए ऐसे कितने वीडियो आप देख चुके होंगे, कहीं कोई मास्टर स्कूल के छात्र को मार रहा है तो कहीं मां बाप ही मिलकर अपने बच्चों का जला रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपनी मर्जी से जाति तोड़ कर शादी कर ली है. हर तरह के वीडियो से आप सामान्य हो चुके हैं. फिर किससे उम्मीद की जाए कि वह इन वीडियो को देखकर बेचैन हो जाएगा. भीड़ की हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने बकायदा एक गाइडलाइन बनाई है. पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था तब तक 18 महीने में 66 बार भीड़ ने हमला किया था और 33 लोगों की हत्या हो गई थी. इंडिया स्पेंड का यह आंकड़ा है. इसी की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि भीड़ द्वारा हत्या के लिए सज़ा तय हो और संसद कानून बनाए. क्या संसद ने कानून बनाया है? क्या संसद को तुरंत इस पर कानून नहीं बनाना चाहिए था, सुप्रीम कोर्ट का आदेश तो जुलाई 2018 का है.
(इस वीडियो के कुछ दृश्‍य आपको विचलित कर सकते हैं.)
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