रवीश कुमार का प्राइम टाइम: गंभीर मुद्दे इन चुनावों से ग़ायब क्यों रहे?

PUBLISHED ON: May 21, 2019 | Duration: 34 min, 38 sec

  
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2019 के चुनाव में अगर किसी चीज़ की हार हुई है तो गंभीरता की हुई है. गंभीर मुद्दे चुनाव से गायब हुए लेकिन कार्टून की दुनिया में उनकी गंभीरता बची रही. इंटरव्यू होता नहीं था कि लोग हंसना शुरू कर देते थे. ह्यूमर नहीं होता तो 2019 का चुनाव सीरीयस नहीं होता. पत्रकारों की जगह अभिनेताओं ने ले ली और सवाल लतीफे बन गए. कई बार तो लगा कि नेता खुद ही कार्टून बन रहे हैं और कार्टूनिस्ट सिर्फ स्केच कर रहे हैं. भयंकर गरमी में हुए इस चुनाव में न्यूज़ चैनल उकताने लगे थे. तभी चौथे चरण के खत्म होते ही 29 अप्रैल को भारतीय सेना ने एक ट्वीट किया कि पहली बार मिथकीय येती के पांव के निशान देखे गए हैं. येती के आते ही चैनलों की बोरियत टूटी और हिम मानव पर चर्चा होने लगी. वैसे ही जैसे टेलकम पावडर के विज्ञापन में पावडर लगाते ही हिमालय की ठंडक आ जाती थी. चुनाव में येती रूपक बन गया. कार्टून का कैरेक्टर बन गया. सत्याग्रह के राजेंद धोड़पकर और बीबीसी हिन्दी के कीर्तिश के कार्टून ने येती को पकड़ लिया. 326 ईसापूर्व में सिकंदर महान जब उसने सिंधु घाटी पर विजय प्राप्त की थी तो उसने इच्छा ज़ाहिर की थी कि वह येती देखना चाहता है. ये जानकारी हमें नेशनल ज्योग्राफिक से मिली है.
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