प्राइम टाइम : बंगाल में सियासी हत्याओं के आरोपों का क्या है सच?

PUBLISHED ON: June 6, 2019 | Duration: 40 min, 40 sec

  
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ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने इन लोकसभा चुनावों में सेंध लगा दी. राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 18 पर बीजेपी ने कब्ज़ा कर लिया और 22 सीटें ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को मिलीं. 2014 में हुए पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने सिर्फ़ दो सीटें जीती थीं. लोकसभा चुनावों ने ये साबित कर दिया कि बंगाल में बीजेपी ने अपनी ज़मीन काफ़ी मजबूत कर ली है. चुनाव से पहले कई महीनों तक बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच तनातनी और हिंसा भी इस बात की ओर इशारा कर रही थी कि बीजेपी जगह बनाने की कोशिश में है और ममता जगह देने को तैयार नहीं. चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी की अमित शाह और नरेंद्र मोदी के साथ तनातनी भी लगातार दिखती रही. अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की कुछ रैलियों के लिए तो इजाज़त भी नहीं मिली. बहरहाल सात चरणों में हुए लोकसभा चुनाव में सबसे ज़्यादा हिंसा पश्चिम बंगाल में ही देखने को मिली जिसमें कई लोगों की जान गई. लोकसभा चुनावों में जीत के बाद प्रधानमंत्री के शपथ समारोह में उन 54 बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों को आमंत्रित किया गया जिनकी राजनीतिक हिंसा में मौत हुई बताई गई. उधर तृणमूल ने भी लिस्ट जारी की. 54 में से 8 नामों को फ़र्ज़ी बताया. अब NDTV की पत्रकार श्रुति मेनन ने इन 54 में से 23 मामलों की छानबीन की.
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