प्राइम टाइम : हिमालय पार प्रतिभा की एक प्रयोगशाला

PUBLISHED ON: August 3, 2018 | Duration: 33 min, 16 sec

  
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प्राइम टाइम की इस कड़ी में पहाड़ों के पार से एक कहानी जिसे समंदर पार से मान्यता मिली है. इंसानियत और समाज के लिए ख़ास काम करने वाली जिन छह शख़्सियतों को इस बार प्रतिष्ठित रैमन मैगसेसे अवार्ड मिला है उनमें से दो भारत से हैं. ये हैं डॉक्टर भरत वातवानी और सोनम वांगचुक. पेशे से इंजीनियर सोनम वांगचुक ने अपनी नायाब सोच और साहस से हिमालय पार लद्दाख के लोगों की मुश्किलों को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है. आर्टिफिशियल ग्लेशियर का उनका प्रयोग आइस स्तूप दुनिया भर में सराहा गया. लद्दाख जैसे इलाके में अप्रैल और मई के महीने में फसलों के लिए पानी की कमी को दूर करने में उनका ये योगदान एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है. सोनम वांगचुक ने लद्दाख के दूर दराज़ के बच्चों की शिक्षा का स्तर सुधारने में एक बड़ी भूमिका निभाई है. उनकी अगुवाई में शिक्षा के लिए शुरू हुए आंदोलन से हज़ारों बच्चों को फ़ायदा हुआ है. इसी आंदोलन से निकला है एक ख़ास स्कूल सेकमॉल. प्रतिभा की इस प्रयोगशाला पर ये ख़ास पेशकश.
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