रवीश कुमार का प्राइम टाइम: सूचना के अधिकार का कानून कितना कारगर रहा?

PUBLISHED ON: October 16, 2019 | Duration: 12 min, 15 sec

  
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12 अक्टूबर को सूचना के अधिकार को लागू हुए 14 साल पूरे हो गए. सरकारों की जवाबदेही तय करने से जुड़ा ये एक ऐतिहासिक क़ानून है जिसने शासन-प्रशासन के कामकाज पर लंबे समय से पड़ा पर्दा उठाया है. जनता को और जागरूक बनाया है. अनुमानों के मुताबिक सूचना के अधिकार के तहत देश भर में हर साल क़रीब 40 से 60 लाख अर्ज़ियां दाखिल होती हैं. भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ तो इस क़ानून ने एक बड़ी भूमिका निभाई है. सरकारें और उनके मातहत काम करने वाले अफ़सर अब अपनी ज़िम्मेदारियों को लेकर ज़्यादा सतर्क और जवाबदेह हो गए हैं. सूचना के अधिकार क़ानून के तहत केंद्रीय स्तर पर केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य स्तर पर सूचना आयोग का गठन किया गया है. आरटीआई के तहत सूचना देने में आनाकानी किए जाने पर जनता इन आयोगों में अपील कर सकती है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सूचना आयोग अपनी वो ज़िम्मेदारियां निभा रहे हैं जिनके लिए उनका गठन किया गया है. सतर्क नागरिक संगठन ने देश भर के सभी 29 सूचना आयोगों के काम पर एक रिपोर्ट तैयार की है.
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