भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच कहां तक पहुंची?

PUBLISHED ON: December 26, 2018 | Duration: 8 min, 37 sec

  
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इस साल पहली जनवरी को महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई थी. उसके ठीक एक दिन पहले यानी 31 दिसंबर 2017 को वहीं पर यलगार परिषद की सभा हुई थी. 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव में हिंसा होती है, 1 व्यक्ति की मौत होती है और कई लोग घायल होते हैं. इसके अलावा 10 करोड़ के बराबर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है. इस मामले को लेकर पुणे पुलिस जांच आरंभ करती है और 6 जून को पांच लोगों को गिरफ्तार करती है. इनके नाम हैं, सुधीर धवले, रौना विल्सन, सुरेंद गडलिंग, शोमा सेन और महेश रावत। इन पर हिंसा भड़काने और माओवादियों से रिश्ता रखने का आरोप लगता है। प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश रचने के आरोप भी लगते हैं. इन पांचों के मामले में पुणे पुलिस ने 15 नवंबर को चार्जशीट दायर कर दी है। हमारी सहयोगी श्रुति मेनन ने कई दिन लगाकर 5600 पन्नों की चार्जशीट का अध्ययन किया है. यह देखने के लिए कि मीडिया में जिन आरोपों की चर्चा हुई है, उससे संबंधित पुलिस ने क्या क्या तथ्य जुटाए हैं। श्रुति मेनन ने अपने अध्ययन में क्या पाया है, उसके पहले एक और घटना के बारे में याद करना ज़रूरी है.
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