लिव इन रिश्तों पर अशालीन टिप्पणी, ये किस सोच की नुमाइंदगी?

PUBLISHED ON: September 5, 2019 | Duration: 2 min, 31 sec

  
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हमारे समय में स्त्रियां बदली हैं लेकिन पुरुष जैसे बदलने को तैयार नहीं है. घरों में, दफ़्तरों में, कचहरियों में ये तकलीफ़देह सच्चाई बार-बार सामने आती है. तीन साल पहले जिस जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने मोर के आंसू से प्रजनन की बात कही थी, उन्होंने फिर एक हैरान करने वाली बात कही. लिव इन में रहने वाली महिलाओं को कन्क्युबाइन बताया. ये वो शब्द है जिसके हिंदी अनुवाद का इस्तेमाल करते हुए संकोच होता है। महिलाओं के हक की लड़ाई की दुहाई देते हुए इन जनाब ने लिव इन पर बैन लगाने की पैरवी की है.
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