'हम लोग' में इस बार तिहाड़ के भीतर से झांकती उम्मीदें

PUBLISHED ON: August 6, 2015 | Duration: 0 min, 43 sec

  
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जेल के अंदर भी सोच कैद नहीं रहती वो कुछ रचती हैं, कभी कविताएं, कभी कुछ और...समाज जिन्हें तिनका मानने लगता है उन तिनकों के ताने बाने की कहानी कहती है 'तिनका-तिनका तिहाड़'...हम लोग में इस बार देखें तिहाड़ की चार दीवारी के पीछे से झांकती उम्मीदें.
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