Mutual funds क्या हैं, इसके बारे में पूरी जानकारी यहां पढ़ें

यदि आप निवेश नहीं कर रहे हैं तो आप गलती कर रहे हैं, आप अपना नुकसान खुद कर रहे हैं. कारण साफ है कि अगर 10 साल यह पैसा ऐसा ही पड़ा रहा तो यह आपको क्या देगा.

Mutual funds क्या हैं, इसके बारे में पूरी जानकारी यहां पढ़ें

म्यूचुअल फंड के बारे में पूरी जानकारी.

नई दिल्ली:

अगर आप नौकरीपेशा हैं और घर के खर्चे के बाद कुछ पैसा बचा पाते हैं और इसकी हाल फिलहाल में कोई आवश्यकता नहीं है तो आप इसे निवेश कर सकते हैं. क्यों यदि आप निवेश नहीं कर रहे हैं तो आप गलती कर रहे हैं, आप अपना नुकसान खुद कर रहे हैं. कारण साफ है कि अगर 10 साल यह पैसा ऐसा ही पड़ा रहा तो यह आपको क्या देगा. कुछ नहीं. इतना ही नहीं इसकी कीमत तब तक कम हो चुकी होगी और पैसा का बाजार मूल्ट घट चुका होगा. यानी 10 साल बाद जब आप यह पैसा लेकर बाजार में जाएंगे तक इतने पैसे में कम सामान खरीदेंगे जो आप आज खरीद पाते. इसका कारण यह है कि आपका पैसा उतने का उतना रहा और बाजार में सामान की कीमत बाजार मूल्य के हिसाब से बढ़ चुकी होगी. इसलिए समझदार बनिए और बेहतर निवेश के विकल्पों को जानिए, समझिए और निवेश कीजिए.

आज बाजार में उपलब्ध कई निवेश के माध्यमों में एक म्यूचुअल फंड है जो पिछले काफी समय से अच्छा विकल्प बना हुआ है. देखा जा रहा है कि पिछले काफी समय से म्युचुअल फंड ने 12-15 फीसदी सालाना ब्याज दिया है जो एक अच्छा रिटर्न समझा जा सकता है. इसे आसानी से समझिए यदि 12 प्रतिशत ब्याज सालाना मिलता है तब आपका पैसा 5 साल में दोगुना हो जाता है. 

क्या होता म्यूचुअल फंड
अंग्रेजी शब्द है म्यूचुअल, इसका अर्थ है आपस में या आपस का या कहें मिलकर और फंड का अर्थ पैसे है.  यानी पैसे को मिलकर प्रयोग करना. यानी आप जहां चाहें या फिर आपका निवेशक जहां चाहे वहां निवेश होगा. इतना ही नहीं इसी के दायरे में यह भी आता है कि आप जैसे अन्य निवेशकों का पैसा भी इकट्ठा किया जाता है और इसे एक फंड के रूप में तैयार कर बेहतर निवेस किया जाता है. यानि पैसा बड़ा और निवेश भी बड़ा. इन पैसों को शेयरों, बांडों, आदि निवेश के अन्य माध्यमों में इस्तेमाल होता है.

क्योंकि आप इसे सीधे निवेश नहीं करते हैं, तो जो कंपनी आपसे पैसा लेती है वह इसे अपने फंड मैनेजर के जरिए निवेश करती है. मतलब साफ है कि म्युचुअल फंड मैनेजरों द्वारा निवेश किया जाता है. इन लोगों का प्रयास होता है कि फंड ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को रिटर्न दे.

म्यूचुअल फंड अमूमन दो प्रकार के होते हैं. एक को ओपन एंडेड फंड कहा जाता है तो दूसरे के क्लोज एंडेड फंड. इसका मतलब यह है कि ओपन एंडेड में आप अपना निवेश जब चाहें अपने हिसाब से तय कर सकते हैं और जब चाहें अपना पैसा मौजूद वैल्यू के हिसाब निकाल सकते हैं. वहीं क्लोज एंडेड का तात्पर्य साफ है कि वह नियमित अवधि के लिए है, कम से कम तीन साल का समय देना होता है. इसे लॉकिंग पीरड भी कह सकते हैं. यह पीरड तीन साल से लेकर 15 साल तक का हो सकता है. यह फंड न्यू फंड ऑफर के समय खरीदा जा सकता है. म्यूचुअल फंड का फायदा यह है कि निवेशक आसानी से इसे कभी भी मौजूदा NAV के हिसाब खरीद बेच सकते हैं.

निवेश की परिकल्पना के हिसाब से म्यूचुअल फंड चार प्रकार के होते हैं.
ग्रोथ फंड्स वाला म्यूचुअल फंड.
इनकम फंड्स वाला म्यूचुअल फंड.
बैलेंस्ड फंड्स वाला म्यूचुअल फंड.
मनी मार्केट फंड्स वाला म्यूचुअल फंड.

ग्रोथ फंड्स - इस फंड के माध्यम से सबसे ज्यादा शेयरों में निवेश किया जाता है. इनका लक्ष्य मध्य से लंबी अवधि में कैपिटल एप्रिसिएशन उपलब्ध कराना है.
इनकम फंड्स - नाम से ही स्पष्ट है. यह निवेशकों को नियमित और स्थिर आय देता है. इनके जरिए तय आय देने वाली सिक्युरिटीज जैसे बॉन्ड, डिबेंचर और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है.

बैलेंस्ड फंड्स - बैलेंस फंड्स के जरिए ऊपर दिए गए दोनों फंड के बीच का रास्ता निकाला जाता है. यानि दोनों तरह के फंड में निवेश किया जाता है. इसमें ग्रोथ के साथ-साथ लगातार आय होना तय होता है. 

मनी मार्केट फंड्स - इस फंड का उद्देश्य आसानी से पैसा उपलब्ध कराना, पूंजी का संरक्षण देना और आय प्रदान करना होता है. इसमें ट्रेजरी बिल, सर्टिफिकेट ऑफ़ डिपाजिट और कमर्शियल पेपर में निवेश किया जाता है.

यहां तक तो म्यूचुअल फंड के बारे में मोटी बात थी. अब कुछ अंदर की बात समझते हैं. अब बाजार में किसी न किसी खास इरादे से म्यूचुअल फंड आते हैं. जिसके बारे में फंड के पेपरों में बताया जाता है. निवेशक इसके बारे में नेट पर चेक कर सकते हैं. कई बार म्यूचुअल फंड इक्विटी यानी शेयरों में निवेश करते हैं. तो कोई सीक्योर फंड में निवेश करताहै. कोई दोनों में निवेश करने की बात कहता है. आप जैसा चाहें निवेश वैसा होता है. साफ है कि जहां रिस्क है वहां ग्रोथ ज्यादा मिलती है. लेकिन यहां रिस्क है यानी कभी नुकसान की संभावना भी है. लेकिन, समझदारी से निवेश करने पर नुकसान टाला जा सकता है. 

एक म्यूचुअल फण्ड सेटअप करने का तरीका है, नियम है और सरकारी मान्यता के हिसाब से ही करना होता है. सेबी का रोल यहां काफी अहम हो जाता है. सबसे एक म्यूचुअल फण्ड एक ट्रस्ट के फॉर्म में सेटअप किया जाता है, जिसमें, स्पॉनसर, ट्रस्टी, एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) और कस्टोडियन शामिल होते हैं. AMC भी वही काम कर सकते हैं जिनके पास सेबी से मान्यता है. 

एनएवी NAV (Net Asset Value) क्या होती है? जब भी म्यूचुअल फंड की बात होती है तब एक टर्म जो बार-बार प्रयोग में आती है, वह है- NAV. एक म्यूचुअल फंड कई जगह पैसे निवेश करता है इसलिए अगर किसी समय फंड से पैसा वापस लेना है तो यह उसकी NAV पर निर्भर करता है. अगर बेचना न भी हो तो फंड में पैसे के बारे में जानने के  लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है. किसी म्यूचुअल फंड की NAV वो कीमत है जिससे उस फंड की एक यूनिट खरीदी या बेची जा सकती है.

म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए किसी सलाहकार से मिलने में कोई बुराई नहीं है. कोई भी नेट के माध्यम से सीधे निवेश कर सकता है. हां, म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने में थोड़ा चार्ज भी देना होता है क्यों कि आपका निवेश मैनेज करने के लिए AMCs जो यह चार्ज लेते हैं. यह चार्ज कुल निवेश का अधिकतम 2.5% तक हो सकता है.