आर्सेलरमित्तल का एस्सार स्टील के अधिग्रहण का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया एनसीएलएटी का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने एस्सार स्टील मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के चार जुलाई के आदेश को शुक्रवार को रद्द कर दिया.

आर्सेलरमित्तल का एस्सार स्टील के अधिग्रहण का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया एनसीएलएटी का आदेश

प्रतीकात्मक फोटो.

सुप्रीम कोर्ट ने एस्सार स्टील मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के चार जुलाई के आदेश को शुक्रवार को रद्द कर दिया. इससे कर्ज में डूबी इस कंपनी के वैश्विक इस्पात कंपनी आर्सेलरमित्तल द्वारा अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है. एनसीएलएटी ने वित्तीय कर्जदाताओं और परिचालन कर्जदाताओं को एक बराबर समझने का आदेश दिया था. आर्सेलरमित्तल ने दिवाला प्रक्रिया के तहत एस्सार स्टील के लिए 42,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई है. न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि दिवाला प्रक्रिया और कर्ज के बोझ में दबी किसी कंपनी के अन्य कंपनी द्वारा अधिग्रहण के दौरान दोनों तरह के कर्जदाताओं को अलग-अलग तरीके से देखा जाना चाहिए.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रहमण्यम भी इस पीठ के सदस्य हैं. पीठ ने कहा कि ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है कि वित्तीय कर्जदाता और परिचालन कर्जदाता को समान तौर पर देखा जाए. पीठ ने कहा, 'एनसीएलएटी का फैसला निश्चित तौर पर खारिज किया जाना चाहिए, क्योंकि इस फैसले में उसने कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) के व्यावसायिक समझ की जगह अपनी समझ को स्थापित कर दिया और इस फैसले में कई तरह के दावों को दाखिल करने की अनुमति दे दी.' 

पीठ ने कहा कि दिवाला संहिता के तहत निपटान प्रक्रिया में वित्तीय कर्जदाताओं को परिचालन कर्जदाताओं के आगे प्राथमिकता दी गई है. फैसला करने वाला अधिकारी कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) द्वारा स्वीकृत फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है. वादियों में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि एनसीएलएटी ने अपने आदेश में कहा था कि दिवाला एवं ऋण शोधन प्रक्रिया के तहत कर्ज में डूबी कंपनी के अधिग्रहण के दौरान हर तरह के कर्जदाता को उनके बकाया का 60.7 प्रतिशत मिलेगा. यह फैसला एनसीएलएटी के चार जुलाई के आदेश को चुनौती देने वाली कर्जदाताओं की समिति और अन्य दीवानी याचिकाओं पर पर आया है.

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