Share Market: शेयर बाजारों में तीन दिन से जारी तेजी पर लगा विराम, सेंसेक्स 189 अंक टूटा

वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका के बीच देश के शेयर बाजारों में पिछले तीन दिन से जारी तेजी पर बुधवार को विराम लग गया.

Share Market: शेयर बाजारों में तीन दिन से जारी तेजी पर लगा विराम, सेंसेक्स 189 अंक टूटा

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई:

वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका के बीच देश के शेयर बाजारों में पिछले तीन दिन से जारी तेजी पर बुधवार को विराम लग गया. बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स बुधवार को 189 अंक टूटकर बंद हुआ. इस दौरान धातु, ऊर्जा, बैंक और वाहन कंपनियों के शेयरों में नुकसान दर्ज किया गया. कारोबारियों के अनुसार हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली और रुपये की विनिमय दर में गिरावट से भी बाजार पर असर पड़ा. इसके अलावा खपत में नरमी और औद्योगिक वृद्धि दर हल्की रहने समेत अन्य कारणों से बाजार में नरमी का रुख रहा. इंडिया रेटिंग्स के देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान कम कर 6.7 प्रतिशत करने से भी बाजार धारणा प्रभावित हुई. रेटिंग एजेंसी ने इससे पहले आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था.

उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 189.43 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 37,451.84 अंक पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 59.25 अंक यानी 0.53 प्रतिशत घटकर 11,046.10 अंक पर बंद हुआ. वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंका से दुनिया के अन्य देशों के शेयर बाजारों पर भी प्रभाव पड़ा. अमेरिकी ट्रेजरी बांड के रिटर्न में कमी की खबर से मंदी की आशंका बढ़ी है. बांड रिटर्न में कमी को आर्थिक संकुचन के रूप में देखा जा रहा है.

घरेलू बाजार में सेंसेक्स के शेयरों में सर्वाधिक नुकसान येस बैंक को हुआ और उसका शेयर 7.47 प्रतिशत नीचे आ गया. मूडीज इनवेस्टर्स सर्विसेज के बैंक के दीर्घकालीन विदेशी मुद्रा निर्गम की रेटिंग घटाये जाने के बाद उसका शेयर नीचे आया. मूडीज इनवेस्टर्स ने बैंक के परिदृश्य को नकारात्मक करार दिया है. वेदांता, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, ओएनजीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति, एनटीपीसी और एचयूएल में भी 4.06 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई. दूसरी तरफ एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी, टीसीएस और एशियन पेंट्स में 2.61 प्रतिशत तक की तेजी रही.

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, 'एफपीआई पर बढ़ा हुआ अधिभार वापस लेने के बावजूद वैश्विक स्तर पर मंदी के जोखिम और बांड रिटर्न में गिरावट के कारण एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) शुद्ध बिकवाल रहे. इन दोनों कारणों का बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ा. इसके अलावा वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 5.7 प्रतिशत रहने के अनुमान और रुपये की विनिमय दर में गिरावट से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई.'
 



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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