ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी, गाड़ियों की बिक्री में आई गिरावट

अर्थव्यवस्था में मंदी का सबसे ज्यादा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ा है. गाड़ियों की बिक्री घटती जा रही है.

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

अर्थव्यवस्था में मंदी का सबसे ज्यादा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ा है. गाड़ियों की बिक्री घटती जा रही है. मंदी का असर हर तरह की गाड़ियों की बिक्री और प्रोडक्शन पर पड़ा है साथ ही जॉब लॉस का खतरा मंडराने लगा है. अब ऑटो सेक्टर ने सरकार से स्टिमुलस पैकेज की मांग की है. इस तिमाही में कारों की बिक्री 23 फ़ीसदी से ज़्यादा घट गई है. ये बात सोसाइटी ऑफ़ ऑटोमोबाइल मनुफक्चरर्स यानी SIAM ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कही है. गिरावट सभी तरह की गाड़ियों की बिक्री में दर्ज हुई है.

SIAM के मुताबिक अप्रैल-जून 2018 के मुक़ाबले अप्रैल जून-2019 में पैसेंजर वेहिकल्स की बिक्री 18.42% घट गई. इस दौरान पैसेंजर कारों की बिक्री 23.32% घटी, जबकि थ्री व्हीलर की बिक्री 7.35% और टू व्हीलरों की बिक्री 11.68% गिरी है. SIAM के डीजी विष्णु माथुर ने कहा, हम सरकार से ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए स्टिमुलस पैकेज की मांग करते हैं. सरकार ऑटोमोबाइल सेक्टर पर जीएसटी की बेस रेट 28% से घटाकर 18% करे.

जब बिक्री घाटी तो ऑटो कंपनियों ने प्रोडक्शन भी घटा दिया है, क्योंकि गाड़ियों की इन्वेंटरी बढ़ती जा रही है. अप्रैल-जून 2018 में सभी तरह की गाड़ियों का प्रोडक्शन देश में 80.64 लाख था, जो अप्रैल-जून 2019 में घटकर 72.15 लाख रह गया. एक साल में सभी तरह की गाड़ियों का प्रोडक्शन करीब 8 लाख घट गया यानी 10.52% की गिरावट हुई.

SIAM के महानिदेशक विष्णु माथुर ने कहा कि अगर ऑटोमोबाइल सेक्टर में स्लोडाउन जारी रहा तो जॉब्स पर असर पड़ेगा. प्रोडक्शन घटता है, जिसका सीधा मतलब है कि हमारे लेबर को घर बैठना पड़ा भले ही उन्हें निकाला नहीं गया. स्लोडाउन जारी रहा तो कंपनियों को कड़े निर्णय लेने होंगे. सबसे पहले नई भर्ती करनी पड़ेगी. गाड़ियों में इससे ज्यादा बड़ी गिरावट 2001 में रिकॉर्ड की गई थी. साफ़ है ऑटोमोबाइल सेक्टर में संकट बढ़ता जा रहा है.

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