संसदीय समिति ने पीएफ ट्रस्ट को छूट देने के लिये कड़े नियम बनाने को कहा

संसद की एक समिति ने सरकार से ट्रस्ट के जरिये अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि का प्रबंधन करने को लेकर प्रतिष्ठानों को दी गयी छूट के लिये मजबूत दिशानिर्देश तैयार करने को कहा है.

संसदीय समिति ने पीएफ ट्रस्ट को छूट देने के लिये कड़े नियम बनाने को कहा

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली:

संसद की एक समिति ने सरकार से ट्रस्ट के जरिये अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि का प्रबंधन करने को लेकर प्रतिष्ठानों को दी गयी छूट के लिये मजबूत दिशानिर्देश तैयार करने को कहा है. समिति ने ऐसे कोष के दुरुपयोग को रोकने के लिये यह सुझाव दिया है. समिति ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि ऐसे छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के लिये बिना दावे वाली राशि को रखने को लेकर कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं है. 

ऐसी आशंका है कि उसमें से कुछ उसे कार्यशील पूंजी के रूप में उपयोग कर सकते हैं. श्रम मामलों पर लोकसभा सदस्य किरिट सोमैया की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति ने यह पाया कि 118 प्रतिष्ठानों के पास कुल कोष एक करोड़ रुपये से कम है और अंतिम बार उन्होंने 2014 और 2015 में रिटर्न दाखिल किया था. समिति का मानना है कि इन प्रतिष्ठानों ने अपने अंशधारकों को लाभ पहुंचाने के लिये शायद ही कोई कदम उठाया होगा. समिति ने कहा कि कोष के दुरूपयोग को रोकने के लिये कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा शायद ही कोई अनुपालन आडिट किया जाता है. समिति के हस्तक्षेप के बाद आडिट प्रणाली में तेजी आयी है. 

रिपोर्ट के अनुसार , ‘‘इसीलिए समिति मानती है कि कुछ छूट प्राप्त प्रतिष्ठान बिना दावे वाली राशि का उपयोग कार्यशील पूंजी के रूप में कर सकते हैं. ’’ इसमें कहा गया है , ‘‘समिति चाहती है कि दिशानिर्देश बनाते समय इन आशंकाओं को ध्यान में रखा जाए तथा छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों को अवैध गतिविधियों में शामिल होने पर रोक लगाने के लिये कड़ा जुर्माना लगाया जा सकता है. ’’

समिति के सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने कहा कि कानूनी प्रावधान पहले से हैं जो संगठनों को बिना दावे वाली राशि के कार्यशील पूंजी के रूप में उपयोग को हतोत्साहित करता है. सरकार ने कहा कि क्षेत्रीय कार्यालयों से ऐसे कोई मामले सामने नहीं आये हैं. इसके अलावा समिति ने सरकार से उन ट्रस्टों पर लगाये जाने वाले अधिभार में संशोधन करने को कहा जो भविष्य निधि का निवेश सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों के अनुसार करने में विफल रहते हैं. साथ ही नियमित तौर पर निरीक्षण करने की भी सिफारिश की.

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