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त्यौहारी मांग के कारण अधिकतर तेल तिलहन की कीमतों में सुधार

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी के रुख और त्यौहारी मांग के कारण स्थानीय तेल तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सरसों सहित ज्यादातर तेल तिलहनों में मामूली सुधार देखने को मिला.

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त्यौहारी मांग के कारण अधिकतर तेल तिलहन की कीमतों में सुधार

प्रतीकात्मक तस्वीर


नई दिल्ली: 

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी के रुख और त्यौहारी मांग के कारण स्थानीय तेल तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सरसों सहित ज्यादातर तेल तिलहनों में मामूली सुधार देखने को मिला. दूसरी ओर सर्दी आने की वजह से मांग कम होने से पामोलीन तेल कीमत पूर्वस्तर पर बनी रही जबकि पर्याप्त स्टॉक तथा सस्ते आयात के कारण मूंगफली तेल, तिलहन कीमत में गिरावट दर्ज हुई. बाजार सूत्रों ने कहा कि अगले सप्ताह के बाद से सरसों की बिजाई शुरु होनी है. इससे पहले नाफेड की सरसों बिकवाली से विशेषकर सरसों किसान बेहाल हैं जिन्हें नाफेड द्वारा एमएसपी से कम दर पर सरसों के बेचने से अपनी लागत को निकालना भी मुश्किल हो रहा है.

राजधानी के एक तेल व्यापारी ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने का आह्वान करते हैं मगर फिर भी बिजाई के ठीक पहले एमएसपी से कम दर पर नाफेड की सरसों बिकवाली से सरसों किसान हतोत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि अगर फसल बेचने की कोई मजबूरी भी हो तो नाफेड को बिजाई का मौसम खत्म होने के बाद यह बिकवाली करनी चाहिये.

उसने कहा कि बिक्री जारी रहने से सरसों किसान के बीच गलत संकेत जायेगा और इसका असर अगले साल उत्पादन पर देखने को मिल सकता है. बाजार सूत्रों ने कहा कि विदेशों में तेजी का रुख है और अमेरिका का सोयाबीन निर्यात में सितंबर माह के दौरान लगभग 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जिससे शिकागो में सोयाबीन कीमतें मजबूत हुई हैं. 

इसके अलावा त्यौहारी मांग होने से अधिकतर खाद्य तेलों के भाव में सुधार दिखाई दिया. तेजी के इस माहौल के बीच सरसों दाना (तिलहन फसल) और सरसों दादरी तेल के भाव पिछले सप्ताहांत के मुकाबले क्रमश: 65 रुपये और 70 रुपये सुधरकर सप्ताहांत में क्रमश: 4,040-4,060 रुपये और 8,040 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए. जबकि सरसों पक्की और कच्ची घानी की कीमतें 10-10 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 1,290-1,590 रुपये और 1,490-1,640 रुपये प्रति टिन पर बंद हुई.

सरसों की यह कीमत अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम ही हैं. अन्य सस्ते खाद्य तेलों का आयात बढ़ने के कारण मांग प्रभावित होने से मूंगफली की कीमत में गिरावट आई और मूंगफली दाना (तिलहन फसल) और मूंगफली मिल डिलिवरी (गुजरात) की कीमतें पिछले सप्ताहांत के मुकाबले 100 रुपये और 500 रुपये की हानि दर्शाती क्रमश: 4,645-4,820 रुपये और 10,000 रुपये क्विंटल पर बंद हुईं.  

पिछले सप्ताहांत के मुकाबले मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड भी सप्ताहांत में 55 रुपये घटकर 1,8400-1,840 रुपये टिन पर बंद हुआ. वनस्पति घी का भाव पिछले सप्ताहांत के मुकाबले 15 रुपये की हानि दर्शाता समीक्षाधीन सप्ताहांत में 885-1,135 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ.

मध्य प्रदेश में बरसात के कारण सोयाबीन फसल को नुकसान पहुंचने और विदेशों में तेजी के रुख के बीच यहां सोयाबीन मिल डिलिवरी दिल्ली, सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम की कीमतें क्रमश: 20 रुपये, 20 रुपये और 10 रुपये के सुधार दर्शाते सप्ताहांत में क्रमश: 8,150 रुपये, 8,000 रुपये और 7,080 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुई. दूसरी ओर मांग प्रभावित होने से सीपीओ एक्स-कांडला का भाव 30 रुपये की हानि दर्शाता सप्ताहांत में 5,450 रुपये क्विंटल पर बंद हुआ. अन्य खाद्य एवं अखाद्य तेलों सहित मक्का खल का भाव पूर्व सप्ताहांत के स्तर पर ही बंद हुआ. 
 



(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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