आम करदाताओं की राहत के लिए मोदी सरकार ने दिया यह निर्देश

देश में नरेंद्र मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से काला धन पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठाए गए. इनमें से एक नोटबंदी भी रही

आम करदाताओं की राहत के लिए मोदी सरकार ने दिया यह निर्देश

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली:

देश में नरेंद्र मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से काला धन पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठाए गए. इनमें से एक नोटबंदी भी रही. देश में काला धन अंकुश लगाने के लिए सबसे बड़ी सरकारी एजेंसी है आयकर विभाग. आयकर विभाग पर हर साल करदाता अपनी आय और कर के बारे में जानकारी देते हैं. ऐसे में विभाग इस जानकारी को क्रासचैक भी करता है और कई बार जानबूझकर दी गई गलत जानकारी पर ऐक्शन भी लेता है. 

ऐसे में यह भी देखा गया है कि कई बार कुछ अधिकारी छोटे करदाताओं को मामूली भूल के लिए परेशान करते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. मोदी सरकार की सामान्य करदाता के कर निर्धारण में कठोरता के साथ आकलन करने को खत्म करने के प्रयासों के तहत कर विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं. हाल में पीएमओ और विभाग में कुछ अधिकारियों के खिलाफ आम करदाताओं को परेशान करने की शिकायतें प्राप्त हुई थीं. बताया जाता है कि कर विभाग ने इस संबंध में कम से कम 10 आकलन निर्धारण अधिकारियों के खिलाफ कारवाई की. 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस मामले में अभी काफी कुछ नहीं हुआ है. कठोर धरातल पर करदाताओं के अनुचित आकलन में बिना गंभीरता के अतिरिक्त आय को जोड़ दिया जाता है, दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं दिया जाता और मामले को तय करने में गंभीरता नहीं दिखाई जाती है.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर विभाग को सख्त निर्देश दिया है कि वह सामान्य करदाताओं के खिलाफ होने वाले कठोर आकलन पर रोक लगाए. साथ ही इस तरह के अतार्किक आदेश देने वाले या इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों का तबादला करे या उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिये. 

सीबीडीटी चेयरमैन सुशील चंद्र ने आयकर विभाग के सभी क्षेत्रीय प्रमुखों को एक पत्र लिखकर यह निर्देश दिए हैं. पत्र में इस संबंध में 2015 में शुरू किए गए अभियान की असफलता पर चिंता व्यक्त की गई है जिसका मकसद करदाताओं की इस तरह के आकलन से जुड़ी शिकायतों का निवारण करना है. 

सीबीडीटी आयकर विभाग के लिए नीतियां बनाने वाला सर्वोच्च निकाय है. बोर्ड ने चार साल पहले इस मामले में हर क्षेत्र के लिए प्रधान मुख्य आयुक्त की अध्यक्षता में एक स्थानीय समिति बनाने का प्रस्ताव किया था जिसका मकसद कर आकलन की कठोर गतिविधियों से जुड़ी करदाताओं की शिकायतों का तेजी से निवारण करना था.