भारत में इलेक्ट्रिक वाहन पेश करने के लिए मर्सिडीज तैयार, लेकिन जताई यह चिंता

कंपनी का मानना है कि 2022 तक उसकी कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 20 से 25 प्रतिशत होगी.

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन पेश करने के लिए मर्सिडीज तैयार, लेकिन जताई यह चिंता

मर्सीडीज का कार.

नई दिल्ली: लग्जरी कार निर्माता कंपनी मर्सिडीज बेंज 2019 तक भारत में इलेक्ट्रिक वाहन उतार सकती है, हालांकि यह ई-वाहनों के लिए अनुकूल कर संरचना पर निर्भर करेगा. कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही. कंपनी वैश्विक स्तर पर ई-वाहनों की विस्तृत श्रृंखला विकसित कर रही है और उसका मानना है कि 2022 तक उसकी कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 20 से 25 प्रतिशत होगी. 

मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ रोलैंड फोल्गर ने कहा, "हम ई-वाहनों को लेकर आश्वस्त हैं और संसाधनों को ई-वाहन विकसित करने में लगा रखा है. 2022-24 तक हमारे पास इस तरह के 15 से 20 नए मॉडल होंगे. हमें विश्वास है कि 2022 तक हमारी बिक्री का 20 से 25 प्रतिशत ई-वाहन से आएगा. हम वैश्विक स्तर पर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. भारत में यह कराधान पर निर्भर करेगा." 

उन्होंने कहा कि 2019 तक हम आकर्षक श्रृंखला के साथ भारत में अपना पहला इलेक्ट्रिक वाहन पेश कर सकते हैं... लेकिन भारत में ऐसी बहुत-सी चीजें जिनका स्पष्ट होना आवश्यक है. 

फोल्गर ने कहा कि हमें ऐसे समाधान की जरुरत है जो पूरी तरह से बाहर तैयार वाहनों (सीबीयू वाहनों) को यहां लाने की अनुमति देता हो... पहले इसे छोटे स्तर पर शुरू करना चाहिए और धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए. आप ऐसा नहीं कर सकते हैं कि सारा लाभ सिर्फ घरेलू स्तर पर वाहनों का निर्माण करने वालों को मिले. 

अधिकारी ने कहा कि पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के कर से जुड़े मामलों में देश से बाहर तैयार इलेक्ट्रिक वाहनों को घरेलू वाहन निर्माताओं के बराबर ही माना जाना चाहिए. वर्तमान माल एवं सेवा कर ( जीएसटी ) व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों पर 12 प्रतिशत कर लगता है. वहीं , दूसरी ओर आयातित कार पर 60 प्रतिशत से 100 प्रतिशत सीमा शुल्क लगता है. यह कीमत और इंजन के आकार पर निर्भर करता है. इसके अलावा सरकार ने 2018-19 के बजट में आयातित मोटर वाहन, कार और मोटरसाइकिल पर सीमा शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया है. वहीं, पूरी तरह से बाहर तैयार मोटर वाहनों (ट्रक और बसों) पर शुल्क 20 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया है.