बिकने की कगार पर जेपी इंफ्रा., एक प्राइवेट कंपनी लगाई 7350 करोड़ रुपये की कीमत

लक्षद्वीप की यह बोली जेपी इंफ्राटेक के उस प्रस्ताव से कम है जो उसने करीब एक साल पहले कर्जदाताओं को कर्ज के भुगतान के लिये रखा था.

बिकने की कगार पर जेपी इंफ्रा., एक प्राइवेट कंपनी लगाई 7350 करोड़ रुपये की कीमत

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली: एक समय कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री की नामी कंपनी रही जेपी इंफ्रा अब बिकने की कगार पर पहुंच गई है. कर्ज में दबी जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की होड़ में लक्षद्वीप प्राइवेट लिमिटेड 7,350 करोड़ रुपये की बोली के साथ अग्रणी दावेदार बनकर उभरी है जबकि इससे पहले यह किसी चर्चा में नहीं थी. जेपी इंफ्राटेक का दिवाला एवं ऋणशोधन कानून के तहत निस्तारण किया जा रहा है. हालांकि लक्षद्वीप की यह बोली जेपी इंफ्राटेक के उस प्रस्ताव से कम है जो उसने करीब एक साल पहले कर्जदाताओं को कर्ज के भुगतान के लिये रखा था.

मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सुधीर वालिया की सुरक्षा एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी और मुंबई केंद्रित दोस्ती रियल्टी की संयुक्त इकाई लक्षद्वीप प्राइवेट लिमिटेड ने बैंकों को नकद में 1,200 करोड़ रुपये देने के साथ चार हजार करोड़ रुपये का भूखंड देने का प्रस्ताव रखा है. प्रस्ताव का शेष हिस्सा गैर-परिवर्तनीय दीर्घावधिक ऋण-पत्र के रूप में देने का प्रस्ताव है.

लक्षद्वीप प्राइवेट लिमिटेड ने बोली में अदानी समूह को पछाड़ा है. अदानी समूह ने 1,200 करोड़ रुपये नकद, 3,500 करोड़ रुपये की जमीन और 3000 करोड़ रुपये के पिछली अवधि के बांड का प्रस्ताव किया है जिनका वर्तमान मूल्यांकन 500-1000 करोड़ रुपये है. (भाषा से इनपुट)