क्या जीएसटी 'गलत शलत टैक्स' है? देखें ऐसा क्यों है...

एनडीटीवी के पत्रकार ऑनिंद्यो चक्रवर्ती ने सिंपल समाचार में इसी मुद्दे पर बात की है. जीएसटी क्या है. देश में पहले कई टैक्स थे जिन्हें खत्म किया गया है. और अब एक टैक्स लगाया गया है.

क्या जीएसटी 'गलत शलत टैक्स' है? देखें ऐसा क्यों है...

प्रतीकात्मक फोटो

मुंबई:

जीएसटी को लागू हुए एक साल पूरा हो गया है. क्या जीएसटी 'गलत शलत टैक्स' है. क्या यह जिस तरह से लागू किया गया है, वह गलत है. क्या जीएसटी भारत जैसे देश के लिए गलत है. एनडीटीवी के पत्रकार ऑनिंद्यो चक्रवर्ती ने सिंपल समाचार में इसी मुद्दे पर बात की है. जीएसटी क्या है. देश में पहले कई टैक्स थे जिन्हें खत्म किया गया है. और अब एक टैक्स लगाया गया है. अब इसमें 5-6 स्लैब हैं. 

व्यापारियों और उद्योगों को टैक्स देने में आसानी. सामान की आवाजाही में आसानी होगी. यह है जीएसटी का ढांचा. पूरे सामान पर नहीं वैल्यू ऐडड पर टैक्स  लिया जाता है.

इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए व्यापारी को जीएसटीएन लेना होगा यानि जीएसटी का सर्टिफिकेट लेना होगा. तभी वैल्यू ऐडेड पर टैक्स लगेगा, वर्ना पहले की तरह पूरा टैक्स देना होगा.

ये जो आसानी थी यही मुसीबत बनती जा रही है. 

भारत में 75-80 प्रतिशत लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं.  अब नियम है कि अगर कंपनी का 20 लाख का रिटर्न है तो उन्हें रजिस्टर होना पड़ेगा. उन्हें आईटीआर भरना होगा. छोटी कंपनियों को पहले टैक्स देना पड़ता है और बाद में रिटर्न वापस मिलता है. तीन महीने बाद पैसा वापस मिलता है. इससे इन कंपनियों को दिक्कत हो रही है. हर महीने जीएसटी देना पड़ रहा है. अगर वे 6-7 प्रतिशत टैक्स दे रहे हैं तब  उनका 20-25 प्रतिशत वर्किंग कैपिटल जीएसटी में फंस रहा है. इससे कई छोटी कंपनियां उधार लेना पड़ रहा है ताकि वे टैक्स दे पाएं. छोटी कंपनियों को ये सबसे बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

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कई शिकायतों और विरोध के बाद सरकार ने प्रक्रिया को सरल बढ़िया है. लेकिन अभी भी छोटे व्यापारियों का कहना है कि टैक्स देने की प्रक्रिया के चलते उनका 4-5 प्रतिशत खर्च बढ़ गया है. 

लेकिन, वर्टिकल इंटीग्रेशन से बड़ी कंपनियों को फायदा हो रहा है. बड़े व्यापारियों को इससे फायदा हो रहा है, क्योंकि उन्हें बाद में टैक्स देना पड़ता है. जो उत्पादन कर रहे हैं उन्हें आसानी है. 

छोटे व्यापारियों को बड़ी कंपनियों की तुलना में 20 प्रतिशत टैक्स ज्यादा देना पड़ रहा है. छोटे व्यापारियों को खासा नुकसान हो रहा है. ऐसे में असंगठित क्षेत्र कमजोर हुआ है. ऐसे में कई राज्यों में उत्पादन कम हुआ है और छोटे उद्योग बंद हुए हैं. ऐसे में इन लोगों के रोजगार गए और कईयों पर खतरा है. वहीं कुछ बड़े नए उद्योग आए और इस आंकड़ा ईपीएफओ में दिख रहा है जहां खाताधारक बढ़े हैं. 

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