चार साल में इस्पात क्षेत्र को सही रास्ते पर लाया गया: बीरेंद्र सिंह

उन्होंने कहा कि सरकार के इस क्षेत्र पर ध्यान देने की वजह से वैश्विक इस्पात उत्पादन में देश दूसरे स्थान पर पहुंच ने को अग्रसर है. 

चार साल में इस्पात क्षेत्र को सही रास्ते पर लाया गया: बीरेंद्र सिंह

बीरेंद्र सिंह.

नई दिल्ली: केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि राजग सरकार के चार साल के कार्यकाल में कई ऐसे कदम उठाए गए जिसकी वजह से घरेलू इस्पात उद्योग को सही रास्ते पर लाया गया. उन्होंने कहा कि सरकार के इस क्षेत्र पर ध्यान देने की वजह से वैश्विक इस्पात उत्पादन में देश दूसरे स्थान पर पहुंच ने को अग्रसर है. 

नरेंद्र मोदी सरकार के चार साल पूरा होने पर सिंह ने कहा, ‘‘यह क्षेत्र उस गति से नहीं बढ़ पा रहा था जिस गति से इसे बढ़ना चाहिए था. नई सरकार (मोदी सरकार) की नीतियों और उसकी पहलों के चलते यह क्षेत्र वापस सही रास्ते पर आया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘जिन परिस्थितियों में वैश्विक इस्पात उद्योग है, उसका असर भारतीय उद्योग पर भी पड़ा है. इसी का परिणाम है कि (कंपनियों के) गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में बढ़ोत्तरी हुई है.’’

उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल जिन 12 बड़े एनपीए खातों की सूची बनायी थी, उनमें से पांच इस्पात क्षेत्र के हैं और यह राशि कुल 1.53 लाख करोड़ रुपये है. सिंह ने कहा, ‘‘हर सरकार विकास पर बात करती है. विकास के बारे में हमारी अवधारणा अलग है. हमारे लिए विकास के मायने बदलाव से हैं. बदलाव व्यवस्था को बदलने की क्षमता रखता है और यदि व्यवस्था बदलती है तो घटनाएं तेजी से घटित होती हैं.’’

सिंह ने कहा कि भारत का इस्पात उद्योग करीब पांच प्रतिशत की संचयी सालाना दर से वृद्धि कर रहा है. एक समय में हमारा देश दुनिया का चौथा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक था और दहाई अंक में उत्पादन के आंकड़े को छू नहीं पाया था. 2015 में हमने अमेरिका को पीछे छोड़कर तीसरे सबसे बड़े इस्पात उत्पादक होने का दर्जा हासिल किया और इस साल हम जापान को पछाड़कर दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कच्चा इस्पात उत्पादक बन जाएंगे. 

देश का कच्चा इस्पात उत्पादन 10 करोड़ टन को पार कर गया है. वर्ष 2017-18 में यह 10.21 करोड़ टन रहा जो 2013-14 में 8.1 करोड़ टन था.