This Article is From Feb 01, 2020

लोकसभा में शुक्रवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2019-20 की प्रमुख बातें

आर्थिक वृद्धि चालू वित्त वर्ष में कम से कम पांच प्रतिशत रहने की संभावना है इसके अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 6 से 6.5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान आर्थिक समीक्षा में लगाया गया है.

लोकसभा में शुक्रवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2019-20 की प्रमुख बातें

आर्थिक समीक्षा 2019-20 लोकसभा में पेश

नई दिल्ली:

आर्थिक वृद्धि चालू वित्त वर्ष में कम से कम पांच प्रतिशत रहने की संभावना है. साथ ही इसके अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 6 से 6.5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान आर्थिक समीक्षा में लगाया गया है. आर्थिक वृद्धि को गति देने के वास्ते चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में ढील देनी पड़ सकती है. चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक वृद्धि के गति पकड़ने का अनुमान है. यह उम्मीद विदेशी निवेश प्रवाह बढ़ने, मांग बेहतर होने तथा जीएसटी संग्रह में वृद्धि समेत 10 कारकों पर आधारित है.

समीक्षा में आर्थिक सुधार तेज करने पर बल दिया गया है, वर्ष 2025 तक भारत को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में नैतिक तरीके से संपत्ति सृजन को महत्वपूर्ण बताया गया है. नियमित क्षेत्र का विस्तार संगठित/नियमित क्षेत्र के रोजगार का हिस्सा 2011-12 के 17.9 प्रतिशत से बढ़कर 2017-18 में 22.8 प्रतिशत पर पहुंचा है. समीक्षा में संपत्ति सृजन, कारोबार के अनुकूल नीतियों को बढ़ावा, अर्थव्यवस्था में भरोसा मजबूत करने पर जोर दिया गया है. वित्त वर्ष 2024-25 तक पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिये इस दौरान बुनियादी संरचना पर 1,400 अरब डॉलर खर्च करने की जरूरत. नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारियों के हिसाब से 2011-12 से 2017-18 के दौरान शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के 2.62 करोड़ नये अवसरों का सृजन हुआ है.

वित्त वर्ष 2011-12 से 2017-18 के बीच नियमित रोजगार में महिला श्रमिकों की संख्या आठ प्रतिशत बढ़ीं है. आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि बाजार में सरकार के अधिक दखल से आर्थिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है. सरकार को उन क्षेत्रों की बाकायदा पहचान करनी चाहिए जहां सरकारी दखल अनावश्यक है और उससे व्यवधान होता है.

सरकारी बैंकों में बेहतर कंपनी संचालन, भरोसा तैयार करने के लिये अधिक खुलासों पर ध्यान देने की वकालत आर्थिक समीक्षा 2019-20 में की गई है. नया कारोबार शुरू करना, संपत्ति का पंजीयन, कर का भुगतान, करार करने आदि को सुगम बनाने पर ध्यान देने पर जोर दिया गया है.



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)