कमजोर वैश्विक रुख से कच्चा तेल वायदा भाव 0.88% फिसला

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में फरवरी में डिलिवरी वाला कच्चा तेल 34 रुपये यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 3,842 रुपये प्रति बैरल पर आ गया.

कमजोर वैश्विक रुख से कच्चा तेल वायदा भाव 0.88% फिसला

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली:

एशियाई बाजारों में कमजोर रुख के साथ प्रतिभागियों के सौदे कम करने से वायदा कारोबार में मंगलवार को कच्चा तेल 0.88 प्रतिशत गिरकर 3,842 रुपये प्रति बैरल पर आ गया. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में फरवरी में डिलिवरी वाला कच्चा तेल 34 रुपये यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 3,842 रुपये प्रति बैरल पर आ गया. इसमें 7,951 लॉट का कारोबार हुआ. बाजार जानकारों ने कहा कि एशियाई बाजारों में कमजोर रुख के साथ कारोबारियों के सौदे कम करने से वायदा कारोबार में कच्चे तेल में गिरावट रही. इस बीच, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल 0.63 प्रतिशत गिरकर 53.70 डॉलर पर जबकि ब्रेंट कच्चा तेल 0.80 प्रतिशत गिरकर 62.24 डॉलर प्रति बैरल पर रहा.

लगातार दूसरे दिन बढ़े पेट्रोल, डीजल के भाव

वायदा भाव में गिरावट के बाद भी भारत में पेट्रोल और डीजल के भाव में बढ़ोतरी हुई है. डीजल के दाम में मंगलवार को लगातार 13वें दिन बढ़ोतरी हुई. पेट्रोल के भाव में भी लगातार छठे दिन वृद्धि दर्ज की गई. उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में नरमी आई है. तेल विपणन कंपनियों ने दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में पेट्रोल के भाव में 13 पैसे जबकि चेन्नई में 14 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई है. वहीं, डीजल के दाम दिल्ली और कोलकाता में 19 पैसे और जबकि मुंबई में 20 पैसे और चेन्नई में 21 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है. दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में मंगलवार को पेट्रोल के भाव क्रमश: 71.27 रुपये, 73.36 रुपये, 76.90 रुपये और 73.99 रुपये प्रति लीटर दर्ज किए। चारों महानगरों में डीजल की कीमतें नई वृद्धि के बाद क्रमश: 65.90 रुपये, 67.68 रुपये, 69.01 रुपये और 69.62 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं.

लगातार 12वें दिन बढ़े डीजल के दाम, पेट्रोल भी हुआ महंगा, अभी राहत के आसार नहीं

अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार कच्चे तेल में नरमी आई है, हालांकि ब्रेंट क्रूड का भाव अभी तब 62 डॉलर प्रति डॉलर से ऊपर चल रहा है और डब्ल्यूटीआई भी 53 डॉलर प्रति बैरल से उच्च भाव पर बना हुआ. कमोडिटी विश्लेषक बताते हैं कि चीन की मंदी की रिपोर्ट के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास की रफ्तार थमने का अंदेशा है इसलिए कच्चे तेल के दाम में गिरावट आई है. विश्लेषक यह भी बताते हैं कि इस गिरावट से फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम है.

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