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बैंकिंग क्षेत्र के संकट की मूल वजह बांड बाजार की समस्या है: कैग

महर्षि ने आगे कहा कि केन्द्रीय बैंक ने बैंकों को असफल होने से बचाने के अपने प्रयासों के तहत नये बैंकों को लाइसेंस देने का काम धीमा कर दिया.

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बैंकिंग क्षेत्र के संकट की मूल वजह बांड बाजार की समस्या है: कैग

बैंकिंग क्षेत्र में कुछ समस्याएं चल रही है.

नई दिल्ली:  भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) राजीव महर्षि ने कहा कि भारत में बैंकिंग क्षेत्र के संकट की मूल वजह बांड बाजार की समस्या है, क्योंकि इस बाजार में रिजर्व बैंक एक नियामक होने के साथ ही कारोबार करने वाला भी है. महर्षि ने आगे कहा कि केन्द्रीय बैंक ने बैंकों को असफल होने से बचाने के अपने प्रयासों के तहत नये बैंकों को लाइसेंस देने का काम धीमा कर दिया.

कैग ने कहा, ‘‘हमारे पास एक विचित्र बांड बाजार है जहां बांड बाजार का नियामक उसमें एक कारोबारी भी है. यह रिजर्व बैंक कानून को गलत तरीके से परिभाषित करना है. देश में बैंकिंग क्षेत्र के संकट की मूल वजह बांड बाजार की समस्या है.’’ महर्षि यहां भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के वार्षिक दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे. 

महर्षि इससे पहले केन्द्रीय वित्त सचिव भी रह चुके हैं. 

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में देश में बहुत कम नये बैंकों को लाइसेंस प्राप्त हुआ है. यह बाजार में एकाधिकार की स्थिति के दुरुपयोग का जीता जागता उदाहरण है. ‘‘रिजर्व बैंक ने इस प्रयास में कि बैंक असफल नहीं हों, नये बैंकों को लाइसेंस देने का काम धीमा कर दिया ... इस प्रकार उसने प्रतिस्पर्धा को कम करने का काम किया है.’’ 

वालमार्ट- फ्लिपकार्ट के 16 अरब डालर के विलय सौदे के बारे में कैग ने कहा, ‘‘वालमार्ट के पास कई ऐसी साझा शेयरहोल्डिंग होंगी जो कि अमेजन में भी होंगी, इसको लेकर चिंता करने की जरूरत है.’’ 

महर्षि ने कहा बाजारों का काफी विस्तार हुआ है और नई अर्थव्यवस्था की वृद्धि भी अच्छी हुई है. उन्होंने कहा कि नई आर्थिकी में भी एकाधिकार है और इस एकाधिकार का दुरुपयोग भी हो सकता है इसलिये हमें इस नई अर्थव्यवस्था पर भी नजर रखने की जरूरत है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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