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फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए नया फार्मूला बनेगा

फसल की लागत से डेढ़ गुना ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंज़ूरी मिलने की संभावना

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फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए नया फार्मूला बनेगा

प्रतीकात्मक फोटो.


नई दिल्ली: 

हाइलाइट्स

  1. पैदावार लागत के आकलन में सभी खर्चे शामिल होंगे
  2. किसान की लागत में ज़मीन की क़ीमत शामिल नहीं होगी
  3. बुधवार को इस बारे में कैबिनेट कर सकती है फ़ैसला

सरकार कहती रही है कि वह किसानों को लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलाने पर काम कर रही है. अब नीति आयोग का कहना है कि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का नया फार्मूला बन रहा है. कल इस बारे में कैबिनेट फ़ैसला कर सकती है.

पिछले शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री मोदी ने गन्ना किसानों को ये भरोसा दिलाया था कि इस हफ्ते किसानों को उनकी फसल की लागत से डेढ़ गुना ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंज़ूरी दे दी जाएगी. अब सरकार ने बुधवार को कैबिनेट में इस प्रस्ताव को मंज़ूरी देने की तैयारी कर ली है.  

सरकार ने खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का नया फार्मूला A2+FL तैयार कर लिया गया है.
जिसे बुधवार को कैबिनेट की बैठक में मंज़ूरी मिल सकती है. मंगलवार को नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा कि नए फार्मूले के तहत अब किसी फ़सल की पैदावार लागत के आकलन में सभी खर्चे शामिल होंगे- जैसे बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, मशीन आदि.

मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से हर साल धान का समर्थन मूल्य बढ़ाया है. पहले दो साल पचास रुपये, तीसरे साल साठ रुपये, पिछले साल 80 रुपये और इस साल 200 रुपये तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.हालांकि किसान की लागत में ज़मीन की क़ीमत शामिल नहीं होगी जिसकी सिफ़ारिश स्वामीनाथन आयोग ने की थी. लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.

नीति आयोग के उपाध्यक्ष  राजीव कुमार ने एनडीटीवी से कहा कि चंडीगढ़ में ज़मीन की कीमत और बहराइच में ज़मीन की कीमत एक समान कैसे हो सकती है...इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी फसल की पैदावार लागत में ज़मीन का खर्च शामिल करना संभव नहीं है.

हालांकि किसान संगठन लागत में ज़मीन के दाम भी शामिल करने की मांग करते रहे हैं. वैसे अगर बुधवार को न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी का फ़ैसला हो गया तो बुवाई में तेज़ी आ सकती है. पूर्व कृषि सचिव शिराज़ हुसैन ने एनडीटीवी से कहा, "किसान इंतज़ार कर रहे हैं...अगर कपास के लिए उन्हें बेहतर MSP मिल जाती है तो वो धान की जगह कपास लगाना पसंद करेंगे.

लगातार मुश्किल होती खेती-किसानी के बीच सरकार के छोटे-छोटे फ़ैसलों पर किसानों की नज़र है. अगर वो न्यूनतम समर्थन मूल्य वाकई लागत से डेढ़ गुना कर देती है तो ये उनके लिए बड़ी राहत होगी. सवाल बस ये है कि लागत किस आधार पर तय हो.



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