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बड़ी कंपनियों को एक चौथाई धन बांड बाजार से जुटाना पड़ सकता है : सेबी का प्रस्ताव

सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा कि यह कदम बजट 2018 के प्रस्तावों के अनुरूप है.

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बड़ी कंपनियों को एक चौथाई धन बांड बाजार से जुटाना पड़ सकता है : सेबी का प्रस्ताव

प्रतीकात्मक फोटो


मुंबई: 

घरेलू बांड बाजार के विस्तार के उपाय कर रहा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) बुनियादी ढ़ाचा क्षेत्र की कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत वित्त की जरूरत बांड बाजार से पूरा करने का नियम बनाने के लिए परामर्श पत्र लाने की तैयारी कर रहा है. सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा कि यह कदम बजट 2018 के प्रस्तावों के अनुरूप है. इसका मकसद ऐसी व्यवस्था करना है ताकि बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनाओं का कम से कम चौथाई हिस्सा बांड बाजार से जुटाया जाए. 

अनुमान है कि अगले एक दशक में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 4,000 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी. त्यागी ने कहा कि सेबी को अभी तक जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की सार्वजनिक क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक के अधिग्रहण की योजना पर कोई पक्का प्रस्ताव नहीं मिला है. 

त्यागी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस बारे में हमें कोई पुख्ता प्रस्ताव नहीं मिला है.’’ यह कदम इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि बैंकिंग प्रणाली में संकट की वजह से बांड बाजार को विस्तार देने की जरूरत है. बैंकिंग प्रणाली का डूबा कर्ज मार्च तक कुल ऋण का 12.6 प्रतिशत पर पहुंच गया है. इस वजह से बैंक निचली साख वाली कंपनियों को कर्ज देने से कतरा रहे हैं. 

त्यागी ने कहा, ‘‘बांड बाजार के विकास की काफी संभावनाएं हैं. इसके लिए एक बेहतर द्वितीयक बाजार की जरूरत है. हम ऋण या बांड खंड के लिए द्वितीयक बाजार विकसित करने को जल्द परामर्श पत्र लेकर आएंगे.’’    

त्यागी ने कहा कि इस बारे में अंतिम दिशानिर्देश सभी अंशधारकों के साथ विचार विमर्श के बाद तय किए जाएंगे. उल्लेखनीय है कि कॉरपोरेट बांड बाजार 290 अरब डॉलर के करीब है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का मात्र 17 प्रतिशत है. वहीं शेयर बाजार जीडीपी का करीब 80 प्रतिशत है. उद्योग मंडल एसोचैम द्वारा आयोजित कॉरपोरेट बांड बाजार पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सेबी प्रमुख ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में दबाव की वजह से हाल के वर्षों में कई कंपनियां धन जुटाने को बांड बाजार का रुख कर रही हैं. 

बुनियादी ढांचा विकास के लिए भारी जरूरत के मद्देनजर बांड बाजार और तेजी से आगे बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि सेबी भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार के साथ विचार विमर्श कर रहा है. उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट बांड के लिए द्वितीयक बाजार विकसित करने को हम कदम उठाएंगे, जिससे तरलता की स्थिति सुधारी जा सकेगी.



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